हल्दीघाटी गुलकंद
गुलकंद क्या है
गुलकंद गुलाब की पंखुड़ियों का पारंपरिक मुरब्बा है। हमारा रोज़ गुलकंद हल्दीघाटी घाटी में चैत्री गुलाब (डमस्क गुलाब) की पंखुड़ियों और मिश्री से बनता है, और इसमें इन दो चीज़ों के अलावा कुछ नहीं है: न रंग, न एसेंस, न प्रिज़र्वेटिव। इसका रंग और खुशबू पंखुड़ियों की अपनी है, इसलिए हर बैच का रंग थोड़ा अलग होता है।
कैसे बनता है
पंखुड़ियों को मिश्री के साथ परत-दर-परत जार में भरकर धूप में पकने दिया जाता है; उबाला नहीं जाता। मिश्री पंखुड़ियों की नमी खींचकर गाढ़ी चाशनी बन जाती है, और यही चाशनी गुलकंद को बिना प्रिज़र्वेटिव के सुरक्षित रखती है। चैत्री गुलाब के बारे में और: हल्दीघाटी का चैत्री गुलाब।
कैसे खाएं
• खाने के बाद एक चम्मच, सीधे
• गर्म या ठंडे दूध में घोलकर
• दही या श्रीखंड में मिलाकर, या टोस्ट पर लगाकर
• मीठे पान में मीठी परत के रूप में
यह गाढ़ा होता है, इसलिए ज़्यादातर लोग एक बार में एक-दो चम्मच ही लेते हैं। और तरीके: गुलकंद कैसे खाएं।
कैसे रखें
ठंडी, अंधेरी जगह पर, सीधी धूप से दूर, ढक्कन कसकर बंद। खोलने से पहले या बाद, फ्रिज की ज़रूरत नहीं। पैकिंग की तारीख जार पर छपी है।
डिलीवरी
पूरे भारत में हर ऑर्डर पर ₹39 डिलीवरी (₹1,999 या उससे ज़्यादा के ऑर्डर पर मुफ़्त)। ऑर्डर 1–2 कार्यदिवस में भेजा जाता है और ज़्यादातर पते पर 3–5 दिन में पहुँचता है। उदयपुर (पिनकोड 313 से शुरू) में आप अपना ऑर्डर बेदला से ले भी सकते हैं। केसर और इलायची वाला गुलकंद भी है: केसर इलायची गुलकंद।
खरीदें
- Rose Gulkand — 470 g, ₹449.
पूरे भारत में ₹39 डिलीवरी, ₹1,999 या उससे ज़्यादा के ऑर्डर पर मुफ़्त।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुलकंद किससे बना है?
दो चीज़ों से: गुलाब की पंखुड़ियाँ और मिश्री। इसमें न रंग मिलाया गया है, न एसेंस, न प्रिज़र्वेटिव।
क्या इसमें सोडियम बेंज़ोएट या कोई प्रिज़र्वेटिव है?
नहीं। यह मिश्री की वजह से सुरक्षित रहता है, इसलिए इसे कसकर बंद करके ठंडी, अंधेरी जगह पर रखें।
क्या गुलकंद में चीनी है?
हाँ। इसमें मिश्री है, जो चीनी ही है, और यही पंखुड़ियों को बिना प्रिज़र्वेटिव के सुरक्षित रखती है। हम शुगर-फ़्री गुलकंद नहीं बनाते।
क्या इसे फ्रिज में रखना ज़रूरी है?
नहीं। जार को खोलने से पहले और बाद में भी ठंडी, अंधेरी जगह पर, सीधी धूप से दूर रखें।
हर बैच का रंग अलग क्यों होता है?
क्योंकि रंग पक्का करने के लिए कुछ नहीं मिलाया जाता। रंग उस मौसम की पंखुड़ियों से आता है, इसलिए एक बैच से दूसरे बैच में थोड़ा बदलता है।